खनिजों का वर्गीकरण (धात्त्विक खनिज) | Classification of minerals (metallic minerals)



भारतमेंखनिजसंसाधनोंकेलिएभू-भौतिक अन्वेषणकठिनहै, मुख्यरूपसेउत्तरमें, जहांजलोढ़मिट्टीकीपरतंनरवेदारचट्टानोंसेघिरीहैं।पुरातनलावाप्रवाहएवंरेगिस्तानखनिजसंसाधनोंकेप्रभावीअन्वेषणमेंएकअन्यबाधाहै।


भारतसरकारनेखनिजसंसाधनोंकेअन्वेषणएवंविकासकेलिएकईसंगठनोंएवंसंस्थानोंकागठनकियाहै।उत्खननकोसंविधिदर्जादेनेकेलिएवर्ष1957 मेंखदानएवंखनिज(विकासएवंविनियमन) अधिनियमलागूकियागया।

भारतीयभूगर्भिकसर्वेक्षण(जीएसआई)सहितकईअन्यमहत्वपूर्णसंगठनभारतमेंखनिजसंसाधनोंकेअन्वेषणएवंविकासमेंसंलग्नहैं।इसकेअतिरिक्तमिनरलएक्सप्लोरेशनलिमिटेड(एमईसीएल) इंडियनब्यूरोऑफमाइन्स(आईबीएम), तथासार्वजनिकक्षेत्रउपक्रमभीइसकार्यमेंशामिलहैं।

भारत-की-खनिज-सम्पदा
भारत-की-खनिज-सम्पदा

भारतीयभूवैज्ञानिकसर्वेक्षण( Geological Survey of India )


यहएकसर्वप्रमुखराष्ट्रीयएवंशोधसंगठनतथायहसरकारकेउद्योगएवंसामन्यतयाजनताकोभू-विज्ञानसुचनाप्रदानकरनेवालाहै।साथहीसाथअंतरराष्ट्रीयभू-वैज्ञानिकमंचपरसक्रियसहभागीहै।

1851 में स्थापितGSI भूवैज्ञानिकसूचनाओंएवंजानकारियोंकासंग्रहकरताहै, उन्हेंअद्यतनरखताहैऔरइसकेलिएजमीनी, समुद्रीतथाआकाशीयसर्वेक्षणकरताहै।

इंडियनब्यूरोऑफमाइंस( Indian bureau of mines )


यहदेशमेंखनिजसंसाधनोंकेवैज्ञानिकविकासकेसंवर्धनमेंलगाहुआहै।खनिजोंकासंरक्षणऔरखानोंमेंपर्यावरणकीरक्षा, कोयला, पेट्रोलियमऔरप्राकृतिकगैस, आण्विकखनिजऔरछोटेखनिजोंकोछोड़करउनकीरक्षाकरताहै।

यहविनियामककार्यकरताहैअर्थात्खनिजसंरक्षणऔरविकासनियमावली, 1988 कोलागूकरना, खानऔरखनिज(विकासऔरविनियमन) अधिनियम, 1957 केसंगतप्रावधानोंकोलागूकरना, खनिजरियायतनियमावली, 1960 औरपर्यावरणसंरक्षणअधिनियम, 1986 औरउनकेअधीनबनाएगएनियमोंकाप्रवर्तनकरना।

मिनरलएक्सप्लोरेशनकारपोरेशनऑफइंडिया( Mineral Exploration Corporation of India )

मिनरलएक्सप्लोरेशनऑफइंडिया(एमईसीएल)कोसरकारद्वारासार्वजनिकक्षेत्रकेउपक्रमकेरूपमें1972 मेंस्थापितकियागयाहै।इसकामुख्यउद्देश्यखनिजपदार्थोंकेव्यवस्थितअनुसंधानएवंखनिजपदार्थोंकेभविष्यएवंइसकेसंभावितदोहनकेबीचसेतुबनानाहै।

इसकेमुख्यकार्यखनिजसंसाधनोंकेअनुसन्धानकेलीयोजनाप्रोत्साहन, संगठनएवंक्रियान्वयनकार्यक्रमोंकोतैयारकरनाहै।एमईसीएलकामुख्यालयनागपुरमेंहै।

राष्ट्रीयखनिजनीति( National mineral policy )


नवीनराष्ट्रीयखनिजनीतिमार्च1993 मेंघोषितकीगयीथी

खनिजोंकेदोहनएवंनिर्यातमेंनिवेशहेतुघरेलूतथाविदेशीकंपनियोंपरकोईप्रतिबंधनहींहै।अबकोईभीविदेशीनागरिककिसीखननकपनीमेंअंशधारणकरसकताहै।खननसम्बंधीपट्टोंकीअवधिमेंव्यापकस्थिरताकीउपलब्धिकोसुनिश्चितकियागयाहैं।

नईखनिजनीतिकानिर्माणनवीनआर्थिकनीतिकेप्रकाशमेंकियागयाहै।सार्वजनिकक्षेत्रकोखनिजोंकेदोहनमेंवृद्धिलासकनेकाजिम्मेदारमानागयाहै।

फरवरी1997 मेंकेंद्रसरकारद्वाराकोयलाएवंलिग्नाइटखानोंपरसेराज्यएकाधिकारकोसमाप्तकरनेकानिर्णयलियागया।

कोयलाखान(राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1973 कोसंशोधितकरकेभारतीयकपनियोंकोकोयलाएवंलिग्नाइटकेखननकाअधिकारदियागयाहै।

विदेशीकपनियांमात्रअंशधारिताकेमाध्यमसेखननकायोंमेंभागीदारबनसकतीहैं।तेलक्षेत्रकोखनिजनीतिमेंशामिलनहींकियागयाहै, क्योंकितेलखोजप्रक्रियामेंनिजीकंपनियोंकोपृथक्रूपसेशामिलहोनेकीअनुमतिप्रदानकीगयीहै।

आणविकखनिजों(यूरेनियमआदि) कोउनकीसंवेदनशीलप्रकृतिकेकारणखनिजनीतिकेदायरेसेबाहररखागयाहै।


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